डार्क एनर्जी: 33.3 अरब साल बाद ‘बिग क्रंच’ से होगा ब्रह्मांड का अंत, जानें क्या है विनाश की नई थ्योरी
International News: क्या ब्रह्मांड हमेशा फैलता रहेगा या सिकुड़कर खत्म हो जाएगा? कॉर्नेल यूनिवर्सिटी और शंघाई जिओ टोंग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की नई रिसर्च ने इस सवाल का जवाब दिया है। डार्क एनर्जी के व्यवहार पर आधारित यह अध्ययन बताता है कि ब्रह्मांड 7 अरब साल बाद सिकुड़ना शुरू करेगा। लगभग 33.3 अरब साल में यह एक बिंदु में समा जाएगा। इसे ‘बिग क्रंच’ यानी महा-संकुचन कहा जा रहा है।
ब्रह्मांड का अंत और डार्क एनर्जी
वैज्ञानिकों ने बताया कि डार्क एनर्जी, जो ब्रह्मांड के 70% हिस्से को बनाती है, पहले स्थिर मानी जाती थी। लेकिन नई रिसर्च कहती है कि यह शक्ति बदल रही है। यह ब्रह्मांड को फैलाने के बजाय सिकुड़ने की ओर ले जा सकती है। यह खोज डार्क एनर्जी सर्वे और डार्क एनर्जी स्पेक्ट्रोस्कोपिक इंस्ट्रूमेंट के डेटा पर आधारित है। यह अध्ययन ब्रह्मांड के भविष्य को समझने में महत्वपूर्ण कदम है।
रबर बैंड जैसा होगा ब्रह्मांड
शोधकर्ताओं ने डार्क एनर्जी को एक अल्ट्रा लाइट पार्टिकल और नेगेटिव कॉस्मोलॉजिकल कॉन्स्टैंट का मिश्रण बताया। इसे समझने के लिए ब्रह्मांड को रबर बैंड की तरह देखें। यह पहले फैलता है, लेकिन एक समय बाद वापस खिंचने लगता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि 7 अरब साल बाद ब्रह्मांड का विस्तार रुक जाएगा। इसके बाद सिकुड़न शुरू होगी, जो अंततः सब कुछ एक बिंदु में समेट देगी।
7 अरब साल बाद आएगा टर्निंग पॉइंट
वर्तमान में ब्रह्मांड 13.8 अरब साल पुराना है। यह अभी भी फैल रहा है। लेकिन शोधकर्ताओं का अनुमान है कि 7 अरब साल बाद यह अपने अधिकतम आकार तक पहुंच जाएगा। तब यह आज से 69% बड़ा होगा। इसके बाद सिकुड़न शुरू होगी। यह प्रक्रिया धीरे-धीरे चलेगी और 33.3 अरब साल में ब्रह्मांड एक बिंदु में सिमट जाएगा। इसे बिग क्रंच कहते हैं।
रिसर्च की अहमियत
यह स्टडी इसलिए खास है क्योंकि यह पहली बार है जब वैज्ञानिकों ने ब्रह्मांड के अंत की भविष्यवाणी एक निश्चित समयसीमा के साथ की है। डार्क एनर्जी सर्वे और डार्क एनर्जी स्पेक्ट्रोस्कोपिक इंस्ट्रूमेंट के डेटा ने इस मॉडल को मजबूती दी। हालांकि, वैज्ञानिकों ने माना कि नेगेटिव कॉस्मोलॉजिकल कॉन्स्टैंट की थ्योरी अभी विवादास्पद है। इसे और डेटा के साथ सत्यापित करना होगा।
क्या है बिग क्रंच
बिग क्रंच का मतलब है कि ब्रह्मांड का सारा पदार्थ और अंतरिक्ष एक बिंदु में सिमट जाएगा। यह बिग बैंग का उल्टा होगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह घटना ब्रह्मांड के विस्तार को रोककर उसे सिकुड़ने की ओर ले जाएगी। यह प्रक्रिया इतनी धीमी होगी कि इसका असर 20 अरब साल तक दिखाई नहीं देगा। लेकिन यह खोज हमारे ब्रह्मांड की प्रकृति को समझने में मदद करती है।
डार्क एनर्जी का बदलता स्वरूप
पहले माना जाता था कि डार्क एनर्जी ब्रह्मांड को हमेशा फैलाती रहेगी। लेकिन नई रिसर्च बताती है कि यह शक्ति डायनामिक है। इसका व्यवहार समय के साथ बदल सकता है। अगर यह कमजोर होती है या उलट दिशा में काम करती है, तो ब्रह्मांड सिकुड़ना शुरू कर देगा। यह खोज भौतिकी की दुनिया में एक नई बहस को जन्म दे रही है।
भविष्य में और शोध की जरूरत
वैज्ञानिकों ने माना कि इस मॉडल में अभी कई अनिश्चितताएं हैं। डार्क एनर्जी का व्यवहार और नेगेटिव कॉस्मोलॉजिकल कॉन्स्टैंट को समझने के लिए और डेटा चाहिए। आने वाले सालों में कई खगोलीय परियोजनाएं डार्क एनर्जी पर और सटीक जानकारी दे सकती हैं। ये परियोजनाएं इस बिग क्रंच मॉडल को सत्यापित या खारिज कर सकती हैं।
इंसानों के लिए इसका मतलब
20 अरब साल का समय इतना लंबा है कि तब तक सूरज बुझ चुका होगा। हमारी आकाशगंगा एंड्रोमेडा से टकरा चुकी होगी। शायद इंसान भी किसी नए रूप में या किसी और जगह होगा। लेकिन यह रिसर्च सिर्फ समयसीमा नहीं देती, बल्कि ब्रह्मांड के नियमों को समझने का नया रास्ता खोलती है। यह मानव की जिज्ञासा और खोज की भावना को दर्शाता है।
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