राफेल डील: फ्रांस का सोर्स कोड न देने का रवैया, भारत रूस से ले सकता है Su-57
Delhi News: राफेल डील में फ्रांस की ओर से सोर्स कोड साझा न करने का रवैया भारत को रूस की ओर ले जा रहा है। भारत स्वदेशी मिसाइलों को राफेल में एकीकृत करना चाहता है। फ्रांस का इनकार भारत को रूसी Su-57 फाइटर जेट की ओर आकर्षित कर रहा है। रूस ने टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और भारत में उत्पादन की पेशकश की है।
राफेल डील में फ्रांस का अड़ियल रवैया
भारत ने 2016 में 36 राफेल विमानों की खरीद की थी। फ्रांस ने कुछ कस्टम फीचर्स जोड़े, लेकिन सोर्स कोड साझा नहीं किया। यह कोड राफेल की कार्यप्रणाली का मूल है। इसके बिना भारत स्वदेशी हथियारों का एकीकरण नहीं कर सकता। फ्रांस का यह रवैया भारत को राफेल मरीन डील पर पुनर्विचार करने को मजबूर कर रहा है।
रूस के साथ बढ़ता सहयोग
रूस ने Su-57 की टेक्नोलॉजी साझा करने की पेशकश की है। रूसी कंपनी भारत में Su-57 का उत्पादन शुरू करने को तैयार है। भारत का कावेरी इंजन रूस में टेस्ट हो रहा है। रूस ने S-400 और S-500 सिस्टम की भी पेशकश की है। यह सहयोग भारत के मेक इन इंडिया लक्ष्यों को बढ़ावा दे सकता है।
सोर्स कोड का महत्व
सोर्स कोड किसी फाइटर जेट की जान होता है। यह सॉफ्टवेयर विमान के हथियार, रडार और सैटेलाइट सिस्टम को नियंत्रित करता है। इसके बिना भारत ब्रह्मोस मिसाइल या स्वदेशी रडार को राफेल में नहीं जोड़ सकता। फ्रांस ने मिराज जेट का भी सोर्स कोड साझा नहीं किया था। यह भारत के लिए तकनीकी स्वतंत्रता की चुनौती है।
भारत का रूस की ओर रुख
भारत राफेल मरीन डील रद्द करने पर विचार कर रहा है। रूस के साथ बातचीत में S-400 की अतिरिक्त यूनिट और Su-57 पर चर्चा हो सकती है। रूस ने भारत में उत्पादन लाइन शुरू करने की पेशकश की है। यह भारत के आत्मनिर्भर रक्षा लक्ष्यों को मजबूत कर सकता है।