पहलगाम हमला: हाईकोर्ट ने डिपोर्ट महिला को भारत वापस लाने का दिया आदेश, जानें क्या है पूरा मामला
Jammu Kashmir News: पहलगाम हमला के बाद रक्षांदा रशीद को पाकिस्तान डिपोर्ट किया गया। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने मानवीय आधार पर उन्हें भारत वापस लाने का आदेश दिया। रक्षांदा 38 साल से जम्मू में पति और बच्चों के साथ रह रही थीं। कोर्ट ने गृहमंत्रालय को 10 दिन में कार्रवाई का निर्देश दिया। उनकी खराब सेहत ने परिवार को चिंतित किया। यह फैसला उनके लिए नई उम्मीद लेकर आया।
कोर्ट का मानवीय रुख
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने पहलगाम हमला के बाद रक्षांदा के डिपोर्टेशन को गलत ठहराया। जस्टिस राहुल भारती ने कहा कि मानवाधिकार सर्वोपरि हैं। रक्षांदा का लॉन्ग टर्म वीजा था। फिर भी उन्हें बिना जांच के डिपोर्ट किया गया। कोर्ट ने गृहमंत्रालय को उनकी वापसी का आदेश दिया। रक्षांदा की बेटी फलक की याचिका पर यह फैसला आया। यह कदम परिवार को फिर से मिलाने की उम्मीद देता है।
रक्षांदा की मुश्किलें
रक्षांदा 38 साल से जम्मू में थीं। पहलगाम हमला के बाद 27 अप्रैल की डेडलाइन के बाद उन्हें डिपोर्ट किया गया। वह लाहौर के होटल में अकेली हैं। उनके पति शेख जहूर ने कोर्ट में बताया कि उनकी कई बीमारियां हैं। पाकिस्तान में उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं। उनकी बेटी ने 30 अप्रैल को याचिका दायर की। कोर्ट ने उनकी सेहत को गंभीरता से लिया। यह फैसला मानवता को प्राथमिकता देता है।
डिपोर्टेशन की पृष्ठभूमि
पहलगाम हमला में 26 लोगों की मौत हुई। इसके बाद सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों को देश छोड़ने का आदेश दिया। 27 अप्रैल को कई लोगों को डिपोर्ट किया गया। रक्षांदा भी इसमें शामिल थीं। कोर्ट ने कहा कि उनका लॉन्ग टर्म वीजा होने के बावजूद प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। यह गलत था। कोर्ट ने गृहमंत्रालय को उनकी वापसी के लिए कदम उठाने को कहा। यह मामला चर्चा में है।
कोर्ट का सख्त आदेश
6 जून को जस्टिस राहुल भारती ने आदेश जारी किया। रक्षांदा को बिना उचित जांच के डिपोर्ट करना गलत था। उनकी सेहत और परिवार को खतरा है। कोर्ट ने गृहमंत्रालय को 10 दिन में उन्हें जम्मू लाने का निर्देश दिया। यह उनके पति शेख जहूर से मिलन के लिए है। कोर्ट ने 1 जुलाई तक अनुपालन रिपोर्ट मांगी। यह फैसला मानवीय संवेदनशीलता को दर्शाता है।
#jammuKashmir #pahalgamAttack