#ForestLand

2026-01-28

"TP.HCM thanh tra việc chuyển đổi 1,92ha đất rừng sang làm dự án nhà máy xử lý rác tại Côn Đảo. Kiểm tra tính hợp pháp trong chuyển mục đích sử dụng đất rừng.

#ThanhTra #DatRung #XuLyRac #ConDao #BaoVeMoiTruong
#Inspection #ForestLand #WasteTreatment #ConDao #EnvironmentalProtection"

vietnamnet.vn/tphcm-thanh-tra-

मोहित ठाकुरrightnewshindi@rightnewsindia.com
2025-07-11

हिमाचल आपदा राहत: बेघर पीड़ितों को जमीन देने में अड़चनें बरकरार, जयराम के बाद सुक्खू सरकार भी लाचार

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में 2023 की विनाशकारी आपदा ने हजारों लोगों को बेघर कर दिया। सरकार ने पीड़ितों को घर बनाने के लिए दो बिस्वा जमीन देने का वादा किया था, लेकिन यह योजना फाइलों में अटकी है। इंडियन फॉरेस्ट एक्ट 1952 के तहत प्रदेश की अधिकांश बंजर और वन भूमि केंद्र सरकार के अधीन है। इस कारण हिमाचल आपदा राहत में देरी हो रही है। पीड़ित परिवार बेसब्री से मदद का इंतजार कर रहे हैं।

1952 की अधिसूचना बनी चुनौती

1952 में जारी अधिसूचना के मुताबिक, हिमाचल में वन भूमि के साथ-साथ बंजर जमीन भी वन भूमि मानी जाती है। यह नियम इंडियन फॉरेस्ट एक्ट 1927 के तहत लागू हुआ था। इसके चलते सरकार के पास उपलब्ध जमीन सीमित है। विकास परियोजनाओं और सामाजिक योजनाओं के लिए भी केंद्र सरकार से मंजूरी लेनी पड़ती है। आपदा पीड़ितों को जमीन देने की प्रक्रिया में यह अधिसूचना सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।

वन संरक्षण कानून ने बढ़ाई मुश्किलें

1980 में लागू वन संरक्षण कानून ने हिमाचल आपदा राहत की राह को और जटिल कर दिया। इस कानून के तहत वन भूमि का उपयोग किसी भी परियोजना या योजना के लिए बिना केंद्र की अनुमति के नहीं हो सकता। कई बार मंजूरी में देरी से विकास कार्य और सामाजिक योजनाएं अटक जाती हैं। विधायक प्राथमिकता की कई परियोजनाएं भी इस कारण लंबित हैं। पीड़ितों को जमीन देने का वादा अभी तक पूरा नहीं हो सका।

सरकार की पहल और कानूनी राय

राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि सरकार 1952 की अधिसूचना पर कानूनविदों से राय लेगी। इसके लिए एक उप-समिति बनाई गई है, जो इस मुद्दे पर गहन अध्ययन कर रही है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर सरकार कानूनी समाधान तलाशेगी। आपदा पीड़ितों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में तीन बिस्वा और शहरी क्षेत्रों में दो बिस्वा जमीन देने की घोषणा पहले भी की जा चुकी है, लेकिन कार्यान्वयन में बाधाएं बरकरार हैं।

पीड़ितों का इंतजार और सरकार की चुनौतियां

हिमाचल प्रदेश पिछले तीन सालों से लगातार आपदाओं का सामना कर रहा है। 2023 की आपदा में हजारों घर तबाह हुए। पूर्व जयराम ठाकुर सरकार ने भी बेघर परिवारों को जमीन देने का वादा किया था, लेकिन यह अधिसूचना रास्ते में रोड़ा बनी। वर्तमान कांग्रेस सरकार भी इस समस्या से जूझ रही है। पीड़ित परिवारों की उम्मीदें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं, जो केंद्र सरकार की मंजूरी पर निर्भर करता है।

#disasterRelief #forestLand

Right News Indianews@rightnewsindia.com
2025-07-05

हिमाचल हाईकोर्ट: वन भूमि से हटाए जाएं सेब के बगीचे, अतिक्रमणकारियों से वसूली जाए लागत; रोकने पर जारी होंगे वारंट

Himachal News: हिमाचल हाईकोर्ट ने वन भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और बीसी नेगी की खंडपीठ ने वन विभाग को सेब के बगीचों को हटाने का आदेश दिया। यह कार्रवाई उन क्षेत्रों में होगी जहां अतिक्रमण हटाने के पहले आदेश जारी हुए थे। कोर्ट ने मानसून में स्थानीय वन प्रजातियों का पौधारोपण करने को कहा। यह कदम पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।

पौधारोपण पर जोर

कोर्ट ने वन विभाग को निर्देश दिया कि सेब के पेड़ हटाने के बाद स्थानीय वन प्रजातियों का पौधारोपण किया जाए। इसके लिए गैर-सरकारी संगठनों और निजी व्यक्तियों की मदद ली जाए। हिमाचल हाईकोर्ट ने इस कार्य को युद्ध स्तर पर करने को कहा। मानसून को पौधारोपण के लिए उपयुक्त समय बताया गया। यह कदम वन क्षेत्रों को पुनर्जनन और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

अतिक्रमणकारियों पर सख्ती

हिमाचल हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने की लागत अतिक्रमणकारियों से वसूलने का आदेश दिया। यह राशि भूमि राजस्व के बकाए के रूप में वसूली जाएगी। कोर्ट ने कहा कि कटाई, स्टंप हटाने और पौधारोपण का खर्चा अतिक्रमणकारियों से लिया जाए। यह कदम अवैध कब्जे को हतोत्साहित करने के लिए उठाया गया। कोर्ट ने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

पुलिस सहायता का निर्देश

कोर्ट ने हिमाचल सरकार के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को वन विभाग को पूरी सहायता देने का आदेश दिया। इसमें पुलिस सहायता भी शामिल है। हिमाचल हाईकोर्ट ने कहा कि आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएं। यह निर्देश वन भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराने और पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने कार्यान्वयन में बाधा डालने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।

जमानती वारंट और नोटिस

आदेशों के कार्यान्वयन में बाधा डालने वालों के खिलाफ कोर्ट ने सख्त कदम उठाए। ऐसे लोगों के लिए 25,000 रुपये के जमानती वारंट और जमानतदारों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बाधा डालने वालों को दंडित किया जाएगा। यह कदम सरकारी कर्मचारियों के कार्य को सुचारू करने के लिए उठाया गया। अगली सुनवाई में प्रगति रिपोर्ट मांगी गई है।

त्वरित कार्रवाई का आदेश

कोर्ट ने राजस्व गांवों में सेब के पेड़ों को तुरंत हटाने का निर्देश दिया। इसकी प्रगति रिपोर्ट 14 जुलाई 2025 को होने वाली अगली सुनवाई में पेश की जाएगी। हिमाचल हाईकोर्ट का यह फैसला वन भूमि को संरक्षित करने और अवैध अतिक्रमण को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण और कानून के पालन पर जोर दिया।

#forestLand #HimachalHighCourt

Himachal High Court
PortalGeekportalgeekco
2024-03-24

El nuevo tráiler de SAND LAND muestra que hay más por explorar que páramos desérticos ¡Forest Land! @BandaiNamcoLA

portalgeek.co/videojuegos/el-n

CPIM Tamilnadutncpim
2021-08-21

வனநில ஆக்கிரமிப்பில் ஈஷா ஜக்கியோடு தேனி மாவட்ட மேகமலை விவசாயிகளையும் சேர்த்து சொல்வது நியாயமா? - தோழர் பெ.சண்முகம், மாநிலப் பொதுச் செயலாளர், தமிழ்நாடு விவசாயிகள் சங்கம்

CPIM Tamilnadutncpim
2021-08-21

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National Heraldnationalherald
2020-01-11

Despite completion of demarcation exercise and issuance of public notices by concerned authorities to encroachers, the situation remains unchanged on the ground due to administrative apathy
nationalheraldindia.com/india/

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